न्यूज डेस्क. 7 दिसंबर का दिन दुनिया के इतिहास में एक अहम स्थान रखता है। 70 साल पहले इसी दिन जापान ने अमेरिका के पर्ल बंदरगाह पर विध्वंसक हमला कर सबको हैरान कर दिया था। इसी घटना के बाद अमेरिका पूरी ताकत के साथ द्वितीय विश्व युद्ध में कूद पड़ा और दुनिया की तस्वीर बदल गई।
7 दिसंबर, 1941 की सुबह लगभग 350 जापानी लड़ाकों ने अमेरिका के अहम नेवल बेस पर्ल हार्बर पर हमला किया। इस हमले में 2,402 अमेरिकी सैनिकों की एकसाथ मौत हो गई थी।
क्यों हुआ था हमला?
जापान दक्षिण-पूर्वी एशिया से युनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड्स और अमेरिका के खिलाफ योजना बना रहा था। अमेरिका के प्रशांत जहाज जापान के इन मंसूबों पर पानी फेर सकते थे। इसलिए उन्हें रोकने के लिए जापान ने यह हमला करने का फैसला किया।
कैसे हुआ हमला, क्या-क्या हुआ नुकसान?
अमेरिका को हिला देने वाले इस हमले के लिए जापानी टास्क फोर्स 26 नवंबर को रवाना हो गई थी। इस दल में छह एयरक्राफ्ट वाहक शामिल थे, जिनके नाम अकागी, कागा, सोरयू, हिरयू, शोकाकू और जुईकाकू थे।
जापान ने 408 विमानों की मदद से हमला करने की योजना बनाई थी। इसमें से 360 विमानों ने पहले दो चरणों में हमला किया। इसके बाद शेष 48 विमानों ने बचाव के लिए तैनात कॉम्बेट एयर पेट्रोल पर हमला किया।
जापान ने हमले को दो चरणों में विभाजित किया था। पहले चरण के लड़ाकों का उद्देश्य था ज्यादा से ज्यादा तबाही मचाना। और दूसरे चरण वालों की जिम्मेदारी थी पहले चरण में बचे जहाजों को खत्म करना।
इस हमले में 2402 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे और 1282 घायल हुए थे। जापान ने इस अटैक में अमेरिका के 18 युद्धपोत नष्ट कर दिए गए थे और 188 विमान तहस-नहस हो गए थे।
क्या हुआ हमले का असर?
इस हमले के अगले दिन तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रेंकलिन डी रूसवेल्ट ने जापान की इस घिनौनी हरकत की निंदा करते हुए 7 दिसंबर के दिन को इतिहास का काला दिन घोषित किया था। साथ ही रूसवेल्ट ने जापान पर जंग का ऐलान कर दिया था। दूसरी तरफ जर्मनी और इटली ने ट्राइपार्टाइट एक्ट के अंतरगत जापान के साथ हाथ मिलाकर अमेरिका के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी।
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