Sunday, 7 February 2016

महंगे दामों पर पेट्रोल और डीजल खरीदने पर मजबूर क्यों ?

सिरसा, 7 फरवरी। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर ने कहा कि केंद्र सरकार पूर्व में मंजूरशुदा सिरसा-फतेहाबाद, अग्रोहा, हिसार वाया महम-रोहतक रेलवे लाइन के लिए पर्याप्त बजट मुहैया कराए ताकि जनसाधारण को सस्ती दरों पर रेल यातायात सुविधा मिल सके। वे रविवार को हुडा स्थित सेक्टर-20 में अपने आवास पर पत्रकारों से रूबरू हो रहे थे।

 उन्होंने कहा कि यूपीए कार्यकाल के दौरान उन्होंने स्वयं जनहित में केंद्रीय रेल मंत्रालय से उक्त लाइन मंजूर करवाकर इसे योजना आयोग के पास भिजवाया था

अरे भाई गली सड़ी सब्ज़ियाँ फेंक क्यों नहीं देते?

टमाटर देना! और हाँ ताज़ा सब्ज़ी देना! गली सड़ी नहीं...। "बाजी! मेरा माल बिलकुल ताज़ा है, देखें, गली सड़ी सब्ज़ियाँ मैं पहले ही पेटी में डाल देता हूँ...।" ये कहते हुए बख़्श ने ठेले के नीचे बंधी पेटी की तरफ़ इशारा किया...।
"अरे भाई गली सड़ी सब्ज़ियाँ फेंक क्यों नहीं देते? क्या ज़रूरत है सँभाल कर रखने की?"
"बाजी, जानवर मवेशी के आगे डाल देता हूँ, बे-ज़बान

क्या वापसी की टिकट के लिए समधी से पैसे मांगना होगा?

यह एक काल्पनिक घटना है, लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है पढ़ कर ज़रूर सोचियेगा

जैसे ही ट्रेन रवाना होने को हुई, एक औरत और उसका पति एक ट्रंक लिए डिब्बे में घुस पडे़। दरवाजे के पास ही औरत तो बैठ गई पर आदमी चिंतातुर खड़ा था। जानता था कि उसके पास जनरल टिकट है और ये रिज़र्वेशन डिब्बा है। टीसी को टिकट दिखाते उसने हाथ जोड़ दिए।

Wednesday, 7 October 2015

किस हक़ से गये हैं पावरफ़ुल मंत्री जी यूएनओ मैं  ?



यूपी की सरकार ओर सरकार के मंत्री हमेशा ही दिखावा ओर दिखावे की हिमायत करते रहे हैं, कभी समाजवादी या बसपा की सरकार ने मानवाधिकार कानून को लागू करने मैं दिलचस्पी तो क्या हाईकोर्ट के कानूनों या आदेशों को नहीं माना.
हमेशा ही दिखावा ओर टालमटोली की
है मानवाधिकार कानून या आयोग को ताक़त या विस्तार करने के नाम पर.
आज अगर यूपी मैं मानवाधिकार आयोग सही ताक़त ओर पूरे जोश से काम कर रहे होते तब प्रदेश की ताक़त ओर हालत बदली हुई होती.
लेकिन हमेशा ही प्रदेश की जनता के साथ धोखा हुआ है ओर मानवाधिकार कानून ओर विस्तार को ठंडे बस्ते मैं डालकर अधिकारियों को जनता का सेवक बनाने या जनता को संवादकर जवाब देही वाला जनसेवक बनाने के बजाये अधिकारी ही रखा है .
तब मैं मान्नीय मंत्री आज़म ख़ान साहब से मालूम करना चाहता हुँ कि आप इतने क़द्दावर ओर सत्ता मैं होते हुए भी कैसे यूएनओ मैं गये?
इससे ये साबित होता है कि आप कमज़ोर ओर लाचार कल भी थे ओर आज भी हैं.
अगर आप सरकार मैं रहकर वो भी उस सरकार मैं जो पूरे बहुमत की सरकार हो अपने आपको कमज़ोर या लाचार महसूस करते हैं तब आपको ऐसी सरकार को ओर पदों को छोड़ देना चाहिए.
आपको यूएनओ मैं गुहार करने से पहले अपने वज़न ओर वजूद को देखना चाहिए था लेकिन शायद समाजवादी की राजनीति करते करते आप सब कुछ भूल बैठे हैं ओर अपने को प्रदेश का मंत्री ना मान आज भी सिर्फ रामपुर का एक आम नागरिक वो भी कमज़ोर ओर लाचार मान रहे हैं .
अगर आपको प्रदेश की जनता के हित मैं कुछ करना ही है तब आप जो मानवाधिकार आयोग के विस्तार मैं रूकावटे पैदा की गई हैं उनको दूर कराकर प्रदेश ओर ज़िलों मैं मानवाधिकार आयोगों को कायम कर जनता को न्याय दिलाने के साथ लूट ओर घोटालों से बचाने का काम करें इसके लिए आवाज़ बुलंद करें तब आपको प्रदेश की जनता हमेशा याद रखेगी.
आपका नाम भी इतिहास मैं दर्ज होगा.
एस एम फ़रीद भारतीय
मानवाधिकार कार्यकर्ता
पूर्व सचिव पीयूसीएल

आपको यह ब्लॉग कैसा लगा, इस खबर के बारे मैं आपके क्या विचार हैं आप अपनी राय हमको ज़रूर दें !

उस दौर मैं ये गाना था तब आज क्या हो ?


दाल, चावल ओर सब्ज़ियां ग़रीब के लिए मेवों से ज़्यादा ओर सोच से बाहर होती जा रही हैं.
एक ज़माना था जब फ़िल्मी दुनियां के लोग भी सच की स्टोरियों पर फ़िल्म बनाकर लोगों को जागरूक किया करते थे .
लेकिन आज जब महंगाई अपने चर्म पर है

Tuesday, 6 October 2015

आज़म साहब आपसे सवाल?


किस हक़ से गये हैं पावरफ़ुल मंत्री जी यूएनओ मैं  ?
यूपी की सरकार ओर सरकार के मंत्री हमेशा ही दिखावा ओर दिखावे की हिमायत करते रहे हैं, कभी समाजवादी या बसपा की सरकार ने मानवाधिकार कानून को लागू करने मैं दिलचस्पी तो क्या हाईकोर्ट के कानूनों या आदेशों को नहीं माना.
हमेशा ही दिखावा ओर टालमटोली की

Monday, 28 September 2015

कहानी तीन बेहतरीन दोस्तों की


    इल्म, दौलत और यक़ीन
 तीनों बहुत अच्छे दोस्त भी थे तीनों में बहुत प्यार भी था
एक वक़्त आया जब तीनों को जुदा होना पड़ा तीनों ने
एक दुसरे से सवाल किया कि हम

Monday, 21 September 2015

AIMIM या औवेसी को हक़ क्यूं नहीं ?

AIMIM ओर अकबरूद्दीन औवेसी के खिलाफ़ आग उगलने वाले कौन हैं, क्या मुस्लिमों को मुल्क मैं अपनी सियासत करने का हक़ संविधान नहीं देता, क्या आज जो सरकार मुल्क मैं हुकूमत कर रही है वो औवेसी भाई या AIMIM की बदौलत है ?
ऐसे ही बहुत से सवाल हैं जिनका जवाब जनता

Friday, 18 September 2015

क्या मेरी ज़िंदगी मैं आयेगा जनता का राज?


सरकार ओर कानून की सही परिभाषा मालूम करनी है तो जेलों मैं जाकर देखो  ?
देश संविधान ओर कानून कहता है कि बेशक सौ गुनाहगार छूट जायें लेकिन कोई बेगुनाह परेशान ना हो ?
क्या मेरे महान भारत मैं इसका पालन किया जा रहा है, आप कहेंगे नहीं, जबकि मैं कहूंगा हां ये सही है

कया है कानून ओर सरकार

कानून क्या है क्या सुप्रीमकोर्ट या सरकार सब हम ही हैं - 1992 मैं एक दरोगा 
ये अल्फ़ाज़ मुझको आज भी याद हैं ओर हमेशा सरकार ओर अदालतों के आदेशों का खुला उल्लंघन होते देखने के बाद तो मेरे ज़हन मैं बिल्कुल ताज़ा हो जाते हैं. 

गाज़ा में पत्रकार भूख से मर रहे हैं- अल जज़ीरा...?

नेशनल न्यूज़ 24 नेटवर्क इंडिया 'अपनी जान जोखिम में डालकर, अब ज़िंदा रहने की लड़ाई लड़ रहे हैं', अल जज़ीरा और एएफपी का कह...