Saturday, 1 September 2012

नरेंद्र मोदी, कपिल सिब्बल राजनीतिक जंग


Photo: नरेंद्र मोदी, कपिल सिब्बल राजनीतिक जंग

अहमदाबाद- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम)-अहमदाबाद अब नरेंद्र मोदी, कपिल सिब्बल और अन्य दलों के लिए राजनीतिक जंग का नया स्थल बन गया है, अब नया टकराव आईआईएम-अहमदाबाद के डायरेक्टर की नियुक्ति को लेकर है, उल्लेखनीय है वर्तमान डायरेक्टर समीर बरुआ की टर्म आगामी अक्टूबर मंे पूरी हो रही है.

आईआईएम के भूतपूर्व चेयरमैन विजयपथ सिंघानिया ने नए डायरेक्टर की तलाश व नियुक्ति के लिए एक समिति भी बनाई थी, जिसका बोर्ड के कुछ सदस्यों ने पुरजोर विरोध भी किया था, आपसी द्वंद के चलते आखिरकार यह समिति बिखरकर खत्म हो गई, नई समिति की रचना को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) और राज्य सरकार ने अपने-अपने प्रतिनिधियों की मांग की थी, जिसे केंद्र सरकार द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था, इसलिए अब यह प्रकिया बहुत जटिल होती जा रही है.

अगर डायरेक्टर पद के लिए कुछ नाम सामने आ भी रहे हैं तो उनके खिलाफ आक्षेप भी लग रहे हैं, इसलिए यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग लेने लगा है, फैकल्टी मैंबर्स का ऐसा मानना है कि मोदी सरकार अपने फायदे हेतु अनुकूल उम्मीदवार के लिए लॉबिंग कर रही है.

चर्चा तो यहां तक है कि मुख्यमंत्री मोदी की इच्छा है कि जिस तरह लालू प्रसाद यादव को रेलवे में सुधार लाने हेतु आईआईएम-ए का प्रमाण-पत्र मिल गया था, उसी प्रकार गुजरात के विकास को लेकर उन्हें भी इस प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूट की ओर से एक प्रमाण पत्र मिल जाए, उल्लेखनीय है कि 2006 में आईआईएम-ए के प्रोफेसर रघुराम द्वारा तैयार किए गए एकेडमिक पेपर में लालूप्रसाद यादव की भरपूर प्रशंसा की गई थी.

दूसरी तरफ, आईआईएम के मामले में एमएचआरडी ने हमेशा से अपना वर्चस्व कायम रखा है, क्योंकि डायरेक्टर की नियुक्ति का अंतिम निर्णय यही मंत्रालय करता है, इसीलिए आज भी इस इंस्टीट्यूट की स्वायत्ता के लिए लड़ाई चालू है, नियुक्ति के बाद महत्वपूर्ण रिसर्च प्रोजेक्ट्स, कन्सलटेशन आदि केंद्र सरकार और उसकी विविध एजेंसियों की ओर से ही आते हैं, उदाहरणस्वरूप भूतपूर्व रेलवे मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने हाल ही में जो रेल बजट पेश किया था, उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्रोफेसर जी. रघुराम को ही सौंपी गई थी.

गुजरात की बात की जाए तो केंद्र सरकार और गुजरात सरकार के संबंध कैसे हैं, यह तो बताने की जरूरत ही नहीं, इसलिए आईआईएम-अहमदाबाद के डायरेक्टर की नियुक्ति में भी मोदी और केंद्र सरकार आमने-सामने हैं...अहमदाबाद- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम)-अहमदाबाद अब नरेंद्र मोदी, कपिल सिब्बल और अन्य दलों के लिए राजनीतिक जंग का नया स्थल बन गया है, अब नया टकराव आईआईएम-अहमदाबाद के डायरेक्टर की नियुक्ति को लेकर है, उल्लेखनीय है वर्तमान डायरेक्टर समीर बरुआ की टर्म आगामी अक्टूबर मंे पूरी हो रही है.

केंद्र अहमदाबाद को दिल्ली के भाव पर दें सीएनजी - गुजरात हाईकोर्ट


Photo: केंद्र अहमदाबाद को दिल्ली के भाव पर दें सीएनजी - गुजरात हाईकोर्ट

 गुजरात हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को दिल्ली-मुंबई के भाव पर अहमदाबाद को कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) देने का आदेश दिया है, साथ ही ताकीद की है कि आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए, मुख्य न्यायाधीश भास्कर भट्टाचार्य एवं जेबी पारडीवाडा की पीठ ने बुधवार को यह व्यवस्था दी.

अदालत ने ध्रागंध्रा प्राकृतिक मंडल की ओर से दायर जनहित याचिका पर यह फैसला दिया, आवेदक ने दिल्ली-मुंबई के भाव पर अहमदाबाद को भी एडमिनिस्टर्ड प्राइज मैकेनिज्म (एपीएम) के तहत गैस आपूर्ति की मांग की थी, बुधवार को फैसले पर केन्द्र सरकार के सहायक अधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने हेतु आदेश पर स्थगन की मांग की जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया.

स्वास्थ्य की कीमत पर सुशासन नहीं: अदालत ने फैसले में टिप्पणी की कि नागरिकों के स्वास्थ्य की कीमत पर सुशासन नहीं चल सकता, यदि दिल्ली और मुंबई को प्रदूषण का प्रमाण घटाने के लिए इन्हें एपीएम के तहत सीएनजी की आपूर्ति सस्ते में की जाती है तो अहमदाबाद को भी यह लाभ दिया जाए.

दूसरी ओर, राज्य के उद्योग राज्यमंत्री सौरभ पटेल ने कहा कि एपीएम के तहत केन्द्र की ओर से गैस आपूर्ति की दशा में गुजरात सरकार दस रुपए कम करने को तैयार है...गुजरात हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को दिल्ली-मुंबई के भाव पर अहमदाबाद को कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) देने का आदेश दिया है, साथ ही ताकीद की है कि आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए, मुख्य न्यायाधीश भास्कर भट्टाचार्य एवं जेबी पारडीवाडा की पीठ ने बुधवार को यह व्यवस्था दी.

रेहान फज़ल की आपबीती- पत्‍नी के क्रेडिट कार्ड से बची थी जान - गुजरात दंगे


Photo: रेहान फज़ल की आपबीती- पत्‍नी के क्रेडिट कार्ड से बची थी जान - गुजरात दंगे

दस साल पहले गोधरा में ट्रेन जलाए जाने के बाद भड़के दंगे को कवर करने गए बीबीसी संवाददाता रेहान फज़ल को किस तरह दंगाइयों की भीड़ का सामना करना पड़ा और किस तरह उन्होंने अपनी जान बचाई, पढि़ए उनके लिखे इस संस्‍मरण में।
 
27 फ़रवरी 2002 की अलसाई दोपहर. मेरी छुट्टी है और मैं घर पर अधलेटा एक किताब पढ़ रहा हूँ. अचानक दफ़्तर से एक फ़ोन आता है. मेरी संपादक लाइन पर हैं. 'अहमदाबाद से 150 किलोमीटर दूर गोधरा में कुछ लोगों ने एक ट्रेन जला दी है और करीब 55 लोग जल कर मर गए हैं.' मुझे निर्देश मिलता है कि मुझे तुरंत वहाँ के लिए निकलना है. मैं अपना सामान रखता हूँ और टैक्सी से हवाई अड्डे के लिए निकल पड़ता हूँ. हवाई अड्डे के पास भारी ट्रैफ़िक जाम है.अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई का काफ़िला निकल रहा है. मैं देर से हवाई अड्डे पहुँचता हूँ. जहाज़ अभी उड़ा नहीं हैं लेकिन मुझे उस पर बैठने नहीं दिया जाता. मेरे लाख कहने पर भी वह नहीं मानते. हाँ यह ज़रूर कहते हैं कि हम आपके लिए कल सुबह की फ़्लाइट बुक कर सकते हैं. अगले दिन मैं सुबह आठ बजे अहमदाबाद पहुँचता हूँ. अपना सामान होटल में रख कर मैं अपने कॉलेज के एक दोस्त से मिलने जाता हूँ जो गुजरात का एक बड़ा पुलिस अधिकारी है. वह मेरे लिए एक कार का इंतज़ाम करता है और हम गोधरा के लिए निकल पड़ते हैं. मैं देखता हूँ कि प्रमुख चौराहों पर लोग धरने पर बैठे हुए हैं. मेरा मन करता है कि मैं इनसे बात करूँ. लेकिन फिर सोचता हूँ पहले शहर से तो बाहर निकलूँ.अभी मिनट भर भी नहीं बीता है कि मुझे दूर से करीब 200 लोगों की भीड़ दिखाई देती है. उनके हाथों में जलती हुई मशालें हैं. वे नारे लगाते हुए वाहनों को रोक रहे हैं. जैसे ही हमारी कार रुकती है हमें करीब 50 लोग घेर लेते हैं. मैं उनसे कुछ कहना चाहता हूँ लेकिन मेरा ड्राइवर इशारे से मुझे चुप रहने के लिए कहता है. वह उनसे गुजराती में कहता है कि हम बीबीसी से हैं और गोधरा में हुए हमले की रिपोर्टिंग करने वहाँ जा रहे हैं. काफ़ी हील हुज्जत के बाद हमें आगे बढ़ने दिया जाता है. डकोर में भी यही हालात हैं. इस बार हमें पुलिस रोकती है. वह हमें आगे जाने की अनुमति देने से साफ़ इनकार कर देती है. मेरा ड्राइवर गाड़ी को बैक करता है और गोधरा जाने का एक दूसरा रास्ता पकड़ लेता है.छुरे से वार
 
जल्दी ही हम बालासिनोर पहुँच जाते है जहाँ एक और शोर मचाती भीड़ हमें रोकती है. जैसे ही हमारी कार रुकती है वे हमारी तरफ़ बढ़ते हैं. कई लोग चिल्ला कर कहते हैं,'अपना आइडेन्टिटी कार्ड दिखाओ.'  
मैं अपनी आँख के कोने से देखता हूँ मेरे पीछे वाली कार से एक व्यक्ति को कार से उतार कर उस पर छुरों से लगातार वार किया जा रहा है. वह ख़ून से सना हुआ ज़मीन पर गिरा हुआ है और अपने हाथों से अपने पेट को बचाने की कोशिश कर रहा है. उत्तेजित लोग फिर चिल्लाते हैं, 'आइडेन्टिटी कार्ड कहाँ है?' मैं झिझकते हुए अपना कार्ड निकालता हूँ और लगभग उनकी आँख से चिपका देता हूँ. मैंने अगूँठे से अंग्रेज़ी में लिखा अपना मुस्लिम नाम छिपा रखा है. हमारी आँखें मिलती हैं. वह दोबारा मेरे परिचय पत्र की तरफ़ देखता है. शायद वह अंग्रेज़ी नही जानता. तभी उन लोगों के बीच बहस छिड़ जाती है. एक आदमी कार का दरवाज़ा खोल कर उसमें बैठ जाता है और मुझे आदेश देता है कि मैं उसका इंटरव्यू रिकार्ड करूँ. मैं उसके आदेश का पालन करता हूँ. वह टेप पर बाक़ायदा एक भाषण देता है कि मुसलमानों को इस दुनिया में रहने का क्यों हक नहीं है. अंतत: वह कार से उतरता है और उसके आगे जलता हुआ टायर हटाता है.   
 
कांपते हाथ
 
मैं पसीने से भीगा हुआ हूँ. मेरे हाथ काँप रहे है. अब मेरे सामने बड़ी दुविधा है. क्या मैं गोधरा के लिए आगे बढ़ूँ जहाँ का माहौल इससे भी ज़्यादा ख़राब हो सकता है या फिर वापस अहमदाबाद लौट जाऊँ जहाँ कम से कम होटल में तो मैं सुरक्षित रह सकता हूँ.लेकिन मेरे अंदर का पत्रकार कहता है कि आगे बढ़ो. जो होगा देखा जाएगा. सड़कों पर बहुत कम वाहन दौड़ रहे हैं. कुछ घरों में आग लगी हुई है और वहाँ से गहरा धुआं निकल रहा है. चारों तरफ़ एक अजीब सा सन्नाटा है. मैं सीधा उस स्टेशन पर पहुँचता हूँ, जहाँ ट्रेन पर आग लगाई गई थी. पुलिस के अलावा वहाँ पर एक भी इंसान नहीं हैं. चारों तरफ़ पत्थर बिखरे पड़े हैं. एक पुलिस वाला मुझसे उस जगह को तुरंत छोड़ देने के लिए कहता है.मैं पंचमहल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजू भार्गव से मिलने उनके दफ़्तर पहुँचता हूँ. वह मुझे बताते हैं कि किस तरह 7 बजकर 43 मिनट पर जब साबरमती एक्सप्रेस चार घंटे देरी से गोधरा पहुँची, तो उसके डिब्बों में आग लगाई गई. वह यह भी कहते हैं कि हमलावरों को गिरफ़्तार कर लिया गया है और पुलिसिया ज़ुबान में स्थिति अब नियंत्रण में है. मेरा इरादा गोधरा में रात बिताने का है लेकिन मेरा ड्राइवर अड़ जाता है. उसका कहना है कि यहाँ हालात ओर बिगड़ने वाले हैं. इसलिए वापस अहमदाबाद चलिए.टायर में पंक्चर
 
हम अपनी वापसी यात्रा पर निकल पड़ते हैं. अभी दस किलोमीटर ही आगे बढ़े हैं कि हम देखते हैं कि एक भीड़ कुछ घरों को आग लगा रही है. मैं अपने ड्राइवर से कहता हूँ, स्पीड बढ़ाओ. तेज़.... और तेज़!  
वह कोशिश भी करता है लेकिन तभी हमारी कार के पिछले पहिए में पंक्चर हो जाता है. ड्राइवर आनन फानन में टायर बदलता है और हम आगे बढ़ निकलते हैं. हम मुश्किल से दस किलोमीटर ही और आगे बढ़े होंगे कि हमारी कार फिर लहराने लगती है. इस बार आगे के पहिए में पंक्चर है. हम बीच सड़क पर खड़े हुए हैं.... बिल्कुल अकेले. हमारे पास अब कोई अतिरिक्त टायर भी नहीं है. ड्राइवर नज़दीक के एक घर का दरवाज़ा खटखटाता है. दरवाज़ा खुलने पर वह उनसे विनती करता है कि वह अपना स्कूटर कुछ देर के लिए उसे दे दें ताकि वह आगे जा कर पंक्चर टायर को बनवा सके.क्रेडिट कार्ड ने जान बचाई
 
जैसे ही वह स्कूटर पर टायर लेकर निकलता है, मैं देखता हूँ कि एक भीड़ हमारी कार की तरफ़ बढ़ रही है. मैं तुरंत अपना परिचय पत्र, क्रेडिट कार्ड और विज़िटिंग कार्ड कार की कार्पेट के नीचे छिपा देता हूँ. यह महज़ संयोग है कि मेरी पत्नी का क्रेडिट कार्ड मेरे बटुए में है. मैं उसे अपने हाथ में ले लेता हूँ. माथे पर पीली पट्टी बाँधे हुए एक आदमी मुझसे पूछता है क्या मैं मुसलमान हूँ. मैं न में सिर हिला देता हूँ. मेरे पूरे जिस्म से पसीना बह निकला है. दिल बुरी तरह से धड़क रहा है. वह मेरा परिचय पत्र माँगता है. मैं काँपते हाथों से अपनी पत्नी का क्रेडिट कार्ड आगे कर देता हूँ. उस पर नाम लिखा है रितु राजपूत. वह इसे रितिक पढ़ता है. अपने साथियों से चिल्ला कर कहता है, 'इसका नाम रितिक है. हिंदू है.... हिंदू है... इसे जाने दो.'! इस बीच मेरा ड्राइवर लौट आया है. वह इंजन स्टार्ट करता है और हम अहमदाबाद के लिए निकल पड़ते हैं बिना यह जाने कि वह भी सुबह से ही इस शताब्दी के संभवत: सबसे भीषण दंगों का शिकार हो चुका है. दस साल पहले गोधरा में ट्रेन जलाए जाने के बाद भड़के दंगे को कवर करने गए बीबीसी संवाददाता रेहान फज़ल को किस तरह दंगाइयों की भीड़ का सामना करना पड़ा और किस तरह उन्होंने अपनी जान बचाई, पढि़ए उनके लिखे इस संस्‍मरण में.

जुबान पर लगाम लगाएं राज ठाकरे ? राजद


Photo: जुबान पर लगाम लगाएं राज ठाकरे ? राजद 

 महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे द्वारा बिहारियों को घुसपैठिया करार देने की धमकी पर सियासी माहौल गरम हो गया है, लालू यादव की पार्टी राजद से सांसद रामकृपाल यादव ने भी राज ठाकरे को देशद्रोही करार दिया है, उन्‍होंने कहा, महाराष्‍ट्र को बिहार के लोगों को अपने खून-पसीने से सींचा है, ठाकरे को अपनी जुबान पर लगाम लगाना चाहिए, ठाकरे बंधुओं को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए, सरकार को ठाकरे के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए.
 
बिहार में सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जेडी (यू) ने राज ठाकरे के इस बयान की कड़ी आलोचना की है, जेडी (यू) प्रवक्‍ता शिवानंद तिवारी ने कहा है, ऐसा लगता है कि राज ठाकरे एक और भिन्‍डरावाले पैदा करना चाहते हैं, मुंबई की हालत यह है कि राज ठाकरे जो चाहते हैं वहीं कानून बन जाता है, ऐसा लगता है कि ठाकरे परिवार देश के कानून और संविधान से इतर एक परिवार है, राज ठाकरे जब देश की बात करते हैं तो उन्‍हें अपनी छाती चौड़ी रखनी चाहिए, उन्‍हें देश के गरीब और पिछड़े इलाके के लोगों के प्रति हमदर्दी होनी चाहिए.
 
जेडी(यू) नेता ने राज ठाकरे के ऐसे बयानों के लिए कांग्रेस को जिम्‍मेदार ठहराया, उन्‍होंने कहा, कांग्रेस ऐसे भस्‍मासुर पैदा करने में माहिर है, कांग्रेस को समझना चाहिए कि भस्‍मासुर एक दिन उसके ही माथे पर हाथ रखेगा और पार्टी जलकर भस्‍म हो जाएगी.  
 
नी‍तीश सरकार में बीजेपी कोर्ट से मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि राज ठाकरे के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलना चाहिए, बीजेपी प्रवक्‍ता मुख्‍तार अब्‍बास नकवी ने कहा कि देश एक फेडरल सिस्‍टम के तहत चलता है, राज ठाकरे की यह टिप्‍प्‍णी मानसिक दिवालियापन का प्रतीक है, ऐसे बयानों से आतंकवाद के खिलाफ बड़ी लड़ाई को नुकसान पहुंच सकता है.महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे द्वारा बिहारियों को घुसपैठिया करार देने की धमकी पर सियासी माहौल गरम हो गया है, लालू यादव की पार्टी राजद से सांसद रामकृपाल यादव ने भी राज ठाकरे को देशद्रोही करार दिया है, उन्‍होंने कहा, महाराष्‍ट्र को बिहार के लोगों को अपने खून-पसीने से सींचा है, ठाकरे को अपनी जुबान पर लगाम लगाना चाहिए, ठाकरे बंधुओं को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए, सरकार को ठाकरे के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए.

मामला अतिथि देवो भव का नहीं, पैसा देवो भव का है.?

Photo: मुंबई. उत्‍तर भारतीयों के खिलाफ टिप्‍पणी के चलते सुर्खियों में रहने वाले एमएनएस चीफ राज ठाकरे और मशहूर गायिका आशा भोंसले के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है, ठाकरे की चुनौती के बाजवूद आशा भोंसले ने कहा कि एमएनएस की धमकी के बावजूद वे एक निजी टीवी चैनल पर जल्द प्रसारित होने वाले रिएलिटी शो में हिस्सा लेंगी, उन्‍होंने राज को जवाब दिया था कि भारत में अतिथि देवो भव का महत्‍व है, लेकिन राज ने कहा है कि अगर पाकिस्तान से हो रहे हमलों के बावजूद आशा भोंसले के लिए वहां के लोग अतिथि देवो भव हैं, तो फिर कसाब को भी वो अतिथि देवो भव क्यों नहीं मान लेती हैं, राज ने निशाना साधते हुए कहा है कि मामला अतिथि देवो भव का नहीं, पैसा देवो भव का है.मुंबई. उत्‍तर भारतीयों के खिलाफ टिप्‍पणी के चलते सुर्खियों में रहने वाले एमएनएस चीफ राज ठाकरे और मशहूर गायिका आशा भोंसले के बीच जुबानी जंग तेज होती जा रही है, ठाकरे की चुनौती के बाजवूद आशा भोंसले ने कहा कि एमएनएस की धमकी के बावजूद वे एक निजी टीवी चैनल पर जल्द प्रसारित होने वाले रिएलिटी शो में हिस्सा लेंगी, उन्‍होंने राज को जवाब दिया था कि भारत में अतिथि देवो भव का महत्‍व है, लेकिन राज ने कहा है कि अगर पाकिस्तान से हो रहे हमलों के बावजूद आशा भोंसले के लिए वहां के लोग अतिथि देवो भव हैं, तो फिर कसाब को भी वो अतिथि देवो भव क्यों नहीं मान लेती हैं, राज ने निशाना साधते हुए कहा है कि मामला अतिथि देवो भव का नहीं, पैसा देवो भव का है.

Thursday, 23 August 2012

ईद की नमाज़ के लिए खोला गुरुद्वारा - बनी भाईचारे की मिसाल


Namazदेश में जिस वक्त अविश्वास और साम्प्रदायिक नफरत का माहौल बना हुआ था, उसी बीच कुछ ऐसा हुआ, जिसने भारत समेत पूरी दुनिया के लिए मिसाल पेश कर दी, उत्तराखंड के जोशीमठ में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ईद की नमाज़ स्थानीय गुरुद्वारे में अता की, लोकल मीडिया की खबरों के अनुसार गुरुद्वारे के प्रबंधक ने ही इसके लिए मुस्लिम समुदाय को आमंत्रित किया था.

असुरक्षित लोंगों को हम पनाह देंगे: मुस्लिम संगठन


देश के प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ दहशत फैलाने वाले कुप्रचार की शनिवार को कड़ी निंदा की है, भारत के सभी इमामों से अपील की है कि ईद की नमाज के बाद दिए जाने वाले उपदेशों में वे मुसलमानों से शांति और भाईचारा बनाए रखने का संदेश दें, ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशवरात, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमाते इस्लामी हिंद, मर्कज़ी जमाते अहले हदीस और

असम में विवाद हिंदू-मुस्लिम नहीं है ? रोटी-रोजी से जुड़ा है !


मुंबई।। मुंबई के प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने सप्ताहभर पहले हिंसा करने वालों और झूठा प्रचार करने वालों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है, 'नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ जिहाद अगेंस्ट अट्रासिटीज एंड टेररिज्म' (निजात) ने अफवाह फैलाने वालों को पकड़वाने के लिए बाकायदा हेल्पलाइन खोल दी है, संगठन के अध्यक्ष मोहम्मद फारूक आजम ने आगाह किया है कि मुसलमानों के कत्लेआम के फेसबुक पर जो विडियो दिखाए जा रहे हैं, वे फर्जी हैं, इसके पीछे दंगे फैलाने की साजिश हो सकती है.

Wednesday, 1 August 2012

बालकृष्ण को भोजन में धीमा जहर भी दिया जा सकता है ?


बालकृष्ण को जहर दिए जाने का डर, एक होगा रामदेव-अन्‍ना का आंदोलनयोगगुरु बाबा रामदेव बालकृष्ण की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जेल में आचार्य को 50 खूंखार कैदियों के साथ रखा गया है, रामदेव को डर है कि बालकृष्ण को भोजन में धीमा जहर भी दिया जा सकता है, ऐसे में बालकृष्ण जेल में सुरक्षित नहीं हैं.

बिजली उत्पादन की सभी 22 इकाइयां ठप, 22 राज्‍यों की बिजली गुल

बिजली उत्पादन की सभी 22 इकाइयां ठप, 22 राज्‍यों की बिजली गुल
केंद्रीय बिजली मंत्री सुशील कुमार शिंदे के लाख दावों के बावजूद 24 घंटे के अंदर ही मंगलवार को नॉर्दर्न ग्रिड एक बार फिर से फेल हो गया, इसके अलावा ईस्‍टर्न और नार्थ ईस्टर्न ग्रिड भी फेल हो गए, एक साथ तीन ग्रिड फेल होने से भारत में अब तक का सबसे बड़ा बिजली संकट उतपन्न हो गया जिसके कारण 22 राज्‍यों की बिजली गुल हो गई.  

गाज़ा में पत्रकार भूख से मर रहे हैं- अल जज़ीरा...?

नेशनल न्यूज़ 24 नेटवर्क इंडिया 'अपनी जान जोखिम में डालकर, अब ज़िंदा रहने की लड़ाई लड़ रहे हैं', अल जज़ीरा और एएफपी का कह...