Tuesday, 4 May 2021

चुनाव जीत लिया अब होगा असल इम्तिहान शुरू...?

एस एम फ़रीद भारतीय
विधायक, प्रधान और पंचायत चुनाव जीतने और इनके अगल बगल रहने वाले मुस्लमानों सुन लो, समझ लो, जो अब हासिल की है जीत वो नहीं, असल मैं मुश्किल मंज़िल तो अब शुरू हुई है, ये इम्तिहान मैं दाख़िला मिला है, यहीं से असल इम्तिहान शुरू होगा...?

देश की सरकार ने ये पद क्यूं शुरू किये हैं ये पद बिना मुनाफ़े के पद है, ये बड़ी ज़िम्मेदारी से निगरानी रखने वाले पद हैं, सरकार को जब लगा कि देश और राज्य की सरकारें

Saturday, 1 May 2021

इस्लाम के ख़िलाफ़ यहूदी साज़िश क्यूं कामयाब...?

अस्सलामु अलेयकुम वारहमत्तुल्लाहि वाबरकातेहु,
शुरू अल्लाह के नाम से, जो बड़ा मेहरबान, रहम करने वाला है.

एस एम फ़रीद भारतीय
दोस्तों एक सवाल किया था. 
बताओ दुआऐं बे असर क्यूं, क्यूं आज हजरत निज़ामुद्दीन रअ, साबिर साहब रअ, बाबा फ़रीद रअ जैसे ओलिया ए कराम पैदा नहीं होते, लेख मैं दी गई सहीह हदीसों को ग़ैर से पढ़ना और समझने की कोशिश ही नहीं अमल भी करना हर मोमिन के

Friday, 23 April 2021

हराम और हलाल और निकाह...?

दोस्तों, 
अस्सलामु अलेयकुम वारहमत्तुल्लाहि वाबरकातेहु.
मेहनत से कमाई करके अपने बाल बच्चों की परवरिश करना, घरवालों को मुहताजी से बचाना और खुद भी बचना बहुत बड़ी इबादत ही नहीं बल्कि इस्लाम के पांच रुक्नों के बाद सबसे बड़ी फ़र्ज़ इबादत है। कुरान व हदीस में इसके बारे में सख्त ताकीद आई है अल्लाह पाक फरमाता है, हमने तुम्हें जमीन पर रहने के लिए जगह दी और उसी में तुम्हारे लिए रोज़ी  बनाई (सूरह आराफ़) और सूरह हजर में फरमाया और हमने तुम्हारे लिए वहां रोज़ी के साधन बनाएं और

Saturday, 17 April 2021

मदरसों को आतंकवाद का अड्डा क्यूं कहा जा रहा है...?

"एस एम फ़रीद भारतीय"
आज के मौजूदा हालात को समझने के लिए हमको मदरसा दारुल उलूम देवबंद को समझना होगा, जिसकी स्थापना 1857 की क्रांति सन्दर्भ में हुई, इस क्रान्ति की वजह अंग्रेजों के ज़रिये पीठ पीछे वार करके मुल्क से मुगल मुस्लिम शासक को हटा देना और अनेकों मुस्लिम संगठनों को या तो बन्द कर देना या दिशाहीन कर देना था, ऐसे में देवबंद में दारुल उलूम की स्थापना हुई जिसका लक्ष्य भारत के मज़लूम और मुसलमानों को धार्मिक शिक्षा प्रदान करना है, इस संस्था को विश्व-भर के

Friday, 16 April 2021

साहब का क्या कसूर...?

आपने जो मांगा साहब ने दिया, आपने स्कूल और अस्पताल मांगे ही कब थे.

सम्पादकीय एस एम फ़रीद भारतीय
एनबीटीवी इंडिया डॉट इन

आपको कश्मीर में प्लाट चाहिए था मिल गया होगा, एक खास जगह पर पूजा करने की बड़ी इच्छा थी मिल गई जगह, बेशक तरीका ग़लत रहा हो, मगर साहब ने जगह दिलाई, जगह

Saturday, 3 April 2021

जल ही जीवन है, सुना होगा मगर जल यानि पानी के कितने प्रकार होते हैं जाने...?

लेखक, सम्पादक
"एस एम फ़रीद भारतीय"
दोस्तों, 
आज के वातावरण में लोगों का संपर्क ज्यादातर दूषित पानी और हवा और भारी तनाव से होता है जिसकी वजह से शरीर में बड़ी मात्रा में अम्लीय व्यर्थ पदार्थ पैदा होते हैं। इसके अलावा  बुढ़ापे की वजह से भी कई बीमारियों का सामना करना पड़ता है। हमारे शरीर मे बीमारी न हो इसके लिए हम अच्छी अच्छी चीज़े खाते पीते हैं और बीमारियों से बचाव करने के लिए दवायों का प्रयोग करते हैं।अल्कलाइन पानी का उपयोग हर तरह की बीमारियों का सबसे

Tuesday, 9 March 2021

सऊदी अरब ने भारत के ख़ज़ाना ख़ाली करने की खोली पोल...?


"एस एम फ़रीद भारतीय"
सम्पादक एनबीटीवी इंडिया 
पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) और उसके सहयोगी देशों द्वारा उत्पादन पर लागू नियंत्रण में उठाने की भारत की अपील को अनसुना कर दिये जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ गये हैं, सऊदी अरब ने भारत से कहा कि वह पिछले साल जब कच्चे तेल के दाम काफी नीचे चले गये थे उस समय खरीदे गये कच्चे तेल का इस्तेमाल कर सकता है, इतना कहते हुए कच्चे तेल का सबसे ज्यादा उपयोग में आने वाले ब्रेंट कच्चे तेल का भाव शुक्रवार को करीब एक प्रतिशत बढ़कर 67.44 डालर प्रति बैरल पर पहुंच गया.

ओपेक और उसके सहयोगी देशों, जिन्हें ओपेक प्लस के

नक्सली रहे मिथुन की ज़िंदगी का कुछ कड़वा सच...?

"एस एम फ़रीद भारतीय"
हम आपको बता दें कि यह बहुत ही कम लोगों को मालूम है कि मिथुन फिल्म उद्योग में प्रवेश करने से पहले एक कट्टर नक्सली हुआ करते थे, लेकिन उनके परिवार को कठिनाई का सामना तब करना पड़ा जब उनके एकमात्र भाई की मौत दुर्घटनावश बिजली के करंट लगने से हो गई, इसके बाद मिथुन अपने परिवार में लौट आये और नक्सली आन्दोलन से खुद को अलग कर लिया, हालांकि ऐसा करने के कारण नक्सलियों से उनके जीवन को खतरा उत्पन्न हो सकता था, क्योंकि नक्सलवाद को वन-वे रोड माना जाता रहा था, यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ और

Monday, 22 February 2021

बेटी की शादी हो या वलीमा दिखावा पड़ रहा है भारी...?

"एस एम फ़रीद भारतीय"
अभी कुछ दिन पहले कुछ शादियों मैं जाने का मौका मिला, वहां के बदलते हालातों को देख जहां कुछ ख़ुशी का अहसास हुआ तो कुछ पल अफ़सोस के भी रहे, ख़ुशी इसलिए कि जाति प्रथा को लोग छोड़कर अब धर्म के आधार पर शादियां कर रहे हैं, वहीं अफ़सोस इस बात का कि दिखावा इन ख़ुशियों पर भारी पड़ रहा है, ये अंर्तजाति शादियां जहां ख़ुशी का सबब बन रही हैं वहीं दिखावा इन शादियों की ख़ुशियों पर कुछ भारी पड़ रहा है, आज नज़र डालते हैं इन बदलते हालातों पर कि कैसे इन रिश्तों की खटास को रोकने की कोशिश की जा सकती है.

बात शुरू करते हैं लॉक डाउन मैं हुई बिन भीड़ भाड़ वाली

Thursday, 4 February 2021

किसान क्या हैं, आतंकवादी या ख़ालिस्तानी या असल किसान...?

"एस एम फ़रीद भारतीय"
सम्पादक- एनबीटीवी इंडिया रजि०
आईये समझते हैं कौन हैं ये आन्दोलनकारी, देश के चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को कुल 17.16 करोड़ वोट मिले थे लेकिन इस बार यह आंकड़ा 33.45 प्रतिशत बढ़कर 22.90 करोड़ को पार कर गया, यानि 23 करोड़ मान सकते हो.

अब अगर हम देखें तो इस आन्दोलन मैं अधिकतर किसान पहले भाजपा के समर्थक थे और

गाज़ा में पत्रकार भूख से मर रहे हैं- अल जज़ीरा...?

नेशनल न्यूज़ 24 नेटवर्क इंडिया 'अपनी जान जोखिम में डालकर, अब ज़िंदा रहने की लड़ाई लड़ रहे हैं', अल जज़ीरा और एएफपी का कह...